यह भजन तपस्या, धर्म और आत्मचिंतन का संदेश देता है। इसमें जीवन की चंचलता, माया और दुनियादारी के मोह को समझने की बात कही गई है। तप और जप से मन को शुद्ध करने, ममता छोड़ने और ज्ञान-ध्यान द्वारा जीवन सफल बनाने की प्रेरणा मिलती है। यह भजन हमें अवसर पहचानकर धर्म के मार्ग पर चलने और आत्मकल्याण की ओर बढ़ने की सीख देता है।
करो तपस्या मिटे समस्या सुनलो रे
🎶लय – दिल दीवाना
करो तपस्या, मिटे समस्या, सुनलो रे,
भवजल तरणी, निर्मल करणी, करलो रे,
ऐसा अवसर, मिले न फिर, संभलो रे।।
तन धन यौवन चंचल माया,
ज्यों बादल की छाया,
दुनियादारी झूठी यारी,
क्यों मन को भरमाया।
मन समझाना, धर्म खजाना, भर लो रे।।
तप जप करते यौवन बीते,
तो हम धन्य बनेंगे,
तन की मन की ममता छूटे,
आवागमन मिटेंगे,
ज्ञान ध्यान कर, ये भव सागर, तरलो रे।।
सुख दुःख अपना ही है,
मूल बात को समझो,
और सभी निमित मात्र है,
भ्रान्ति में न उलझो।
‘संजय’ ज्योति, सदगुण मोती, चुनलो रे।।
यह भजन हमें समझाता है कि सुख-दुःख हमारे कर्मों से जुड़े हैं। इसलिए मोह और भ्रम छोड़कर तप, धर्म, ज्ञान और सद्गुणों को अपनाना चाहिए। यही आत्मशांति और मुक्ति की ओर सच्चा मार्ग हमेशा है।
🙏जय जिनेंद्र🙏
