आत्म चिन्तन – मुझे तो करना निज कल्याण (Aatm Chintan – Mujhe To Karna Nij Kalyan)

यह आत्मचिन्तन गीत हमें अपने जीवन को सही दिशा देने की प्रेरणा देता है। इसमें बताया गया है कि मनुष्य को दूसरों की बातों से प्रभावित होने के बजाय अपने आत्मकल्याण और जनकल्याण पर ध्यान देना चाहिए। सच्ची महानता अपने अच्छे विचार, शांत मन और दृढ़ संकल्प से आती है। यह रचना आत्मजागरण का सुंदर संदेश देती है। 

 

आत्म चिन्तन - मुझे तो करना निज कल्याण

🎶 लय – साधक के बाधक 

✍🏻 रचयिता – आचार्यश्री महाश्रमणजी

 

मुझे तो करना निज कल्याण। 

मुझे तो करना जन-कल्याण।। 

दुनिया मुझको कैसा समझती, 

क्यों देना यह ध्यान।।

 

औरों के कहने से कोई, 

बनता नहीं महान। 

मैं कैसा हूं इसका सच्चा, 

व्यक्ति स्वयं प्रमाण।।

 

दुर्जन के कहने से छोटा, 

होता नहीं इन्सान। 

मेरी आत्मा ही मेरी यह,

चिन्तन शान्ति निधान।।

 

यह मेरा यह तेरा करती, 

आत्मा का नुकसान। 

अच्छे को भी बुरा बनाते, 

कुछ मानव नादान।।

 

निन्दा होती या स्तवनाएं, 

इससे मैं बेभान। 

दृढ़संकल्पी मानव करता, 

मुश्किल को आसान।।

 

यह गीत हमें आत्मचिन्तन, आत्मविश्वास और सकारात्मक सोच का संदेश देता है। जीवन में दूसरों की बातों से विचलित हुए बिना, शांत मन के साथ आगे बढ़ना ही सच्चे कल्याण और सफलता का मार्ग है। 

🙏जय जिनेंद्र🙏