बाबै रो नाम बड़ो है प्यारो ओ (Babe Ro Naam Bado Hai Pyaro O)

यह भजन “बाबै रो नाम बड़ो है प्यारो” गहरी श्रद्धा और भक्ति से भरा हुआ है। इस भजन की रचना मुनि विजयकुमार जी ने की है। इसमें प्रभु के नाम की महिमा और उनके प्रति अटूट विश्वास को सरल भाषा में व्यक्त किया गया है। भजन हमें साहस, श्रद्धा और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। प्रभु का नाम जपने से मन को शांति और जीवन में उजाला मिलता है। 

 

बाबै रो नाम बड़ो है प्यारो ओ

🎶 लय – बन्ना रे बागां में झूला घाल्या 

✍🏻 रचयिता – मुनि विजयकुमार जी 

 

बाबै रो, नाम बड़ो है प्यारो ओ। 

म्हारी आंख्यां रो, तारो जीवन रो है उजियारो।।

 

सिंह री, ज्यूं गूंज्यो जीवन रण में ओ,  

कायरता, कभी न ल्यायी मन में ओ। 

नहीं पायो है, पार प्रभु री शूरवीरता रो।।

 

सुधरी री, छतर्यां में प्रभु वास कर्यो, 

अन्धेरी, ओरी में चौमास कर्यो। 

मिल्यो सगळा नै, परचो बाबै री महिमा रो।।

 

मेरू ज्यूं, निज प्रण पर बो अटल रह्यो,  

भावुक बण, जन प्रवाह में नहीं बह्यो। 

छोड़ फूलां नै, स्वीकार कर्यो पथ कांटां रो।।

 

श्रद्धा स्यूं, जो भी प्रभु नै सिंवरै ओ, 

उण नर रो, मिनख जमारो सुधरै ओ। 

लाखां लोगां रै, जीवन रो है बाबो रखवारो।।

 

दर्शण नै, मनड़ौ घणो उम्हावै ओ, 

रसना आ, प्रभु री रटन लगावै ओ।

ध्याऊं हर घड़ी, ‘विजय’ सांवरिये रो उणियारो।।

 

यह भजन हमें सिखाता है कि सच्ची श्रद्धा और विश्वास से जीवन सुधरता है। प्रभु का नाम स्मरण करने से मन में शांति, साहस और सकारात्मकता आती है और जीवन सही दिशा में आगे बढ़ता है।

🙏 जय जिनेंद्र 🙏