यह भजन “एक बार आओ म्हारा सांवरिया स्वामीजी” गहरी भक्ति और प्रेम से भरा हुआ है। इस भजन की रचना मुनि सुमतिकुमार जी ने की है। इसमें भक्त अपने स्वामी को प्रेमपूर्वक पुकारता है और उनके दर्शन की इच्छा व्यक्त करता है। भजन में धर्म, त्याग और अहिंसा के संदेश को सरल भाषा में प्रस्तुत किया गया है। यह हमें सच्ची भक्ति और श्रद्धा का मार्ग दिखाता है।
एक बार आओ म्हारा सांवरिया स्वामीजी
🎶 लय – बालम छोटो सो (पाँच बरस को मेघूड़ो)
✍🏻 रचयिता – मुनि सुमतिकुमार जी
एक बार आओ म्हारा सांवरिया स्वामीजी।
थांनै भगत बुलावे दिन रात, आवो म्हारां स्वामीजी।।
दीपा बाई रो नंदन प्यारो बल्लूसा रो लाल,
तेरापंथ संघ रा हो, पहला गणपाल।
थांरी महिमा फैली च्यारूं कूंट,
आओ म्हारा स्वामीजी।।
वीर प्रभु री वाणी ऊपर जीवन अर्पित सारो,
धर्म, अहिंसा, त्याग प्रबल तेरापंथ रो नारो।
थांनै झुक झुक करां म्हें प्रणाम,
आओ म्हारा स्वामीजी।।
मंत्र बड़ो ओ भगतां रो संकट सब टळ जावै,
दुःख में सुख में नाम आपरो भगतां रे मन भावै।
थां स्यूं एक बार जुड़ जावै तार,
आओ म्हारा स्वामीजी।।
पल-पल छिन-छिन निशदिन थांरो ध्यावां म्हें तो ध्यान,
आत्मा में शक्ति जागे मांगा ओ वरदान।
म्हारै मनड़े में गूंजे थांरो नाम,
आओ म्हारा स्वामीजी।।
नंदनवन सो शासन पाकर फूल्या नहीं समावां,
तुलसी गुरु सा गणपति पाया अपणो भाग्य सरावां।
भिक्षु संघ ने अर्पित प्राण,
आओ म्हारा स्वामीजी।।
भगतां रै मन री इच्छा पूरी करो स्वामी,
दरसन रा प्यासा म्हें तो सुणो अंतर्यामी।
‘मुनि सुमति’ करे अरदास,
आओ म्हारा स्वामीजी।।
यह भजन हमें सिखाता है कि सच्चे मन से की गई भक्ति अवश्य फल देती है। स्वामी के प्रति प्रेम और विश्वास रखने से जीवन में शांति, सुख और आत्मिक शक्ति प्राप्त होती है।
🙏 जय जिनेंद्र 🙏
