यह भक्ति गीत मुनि श्री मोहजीत कुमार जी द्वारा रचित है। इसमें आचार्य भिक्षु के प्रति गहरी श्रद्धा, भक्ति और समर्पण प्रकट किया गया है। गीत में उनके संयम, त्याग और धर्म के प्रचार का सुंदर वर्णन है। हर पंक्ति हमें उनके आदर्शों को समझने और जीवन में अपनाने की प्रेरणा देती है। यह भजन मन को शुद्ध करता है और भक्ति भाव को बढ़ाता है। इसे गाने से आत्मा को शांति और आनंद की अनुभूति होती है।
समरां बाबै रो नित नाम
🎶 लय – झड़ाको माला रो लेणो
✍🏻 रचयिता – मुनि श्री मोहजीत कुमार जी
समरां बाबै रो नित नाम।
सरधा रे भावां स्यूं ध्यायां, सिद्ध हुवै सब काम।।
जीवन रा उजियारा म्हारा, अन्तर घट रा राम।
गंगा जल सा पावन उजला, म्हारा भिक्खु स्वाम।।
संजम रा हा निर्मल पजवा, संजम बांरो प्राण।
‘मर पूरा म्हें देस्यां’ करस्यां, जीवन रो कल्याण।।
जिण आणां रो सदा आसरो, लेकर घुम्या स्वाम।
धर्म क्रान्ति रो बिगुल बजायो, गुंजायो घर गाम।।
सुध आचार पलावण खातर, दिन्हो संघ महान।
एक गुरु, अनुशासन रो थे, किन्हो जबर विधान।।
इसो सुरंगो संघ आपणो, ईं पर घणो गुमान।
ईं शासण रो सगला मिलकर, सदा बढ़ावां मान।।
ओ आपां रो मन मंदिर है, ओ ही तीरथ धाम।
‘मोहजीत’ बलिहारी जावै, पल-पल आठूं याम।।
यह भजन हमें आचार्य भिक्षु के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। उनके आदर्श अपनाकर हम अपने जीवन को सफल बना सकते हैं और सच्चे धर्म के रास्ते पर आगे बढ़ सकते हैं।
🙏 जय जिनेंद्र 🙏
