म्हारै हिवड़े रो हार चमक्यो सूरज गण गिगनार (Mhare Hivde Ro Haar Chamkyo Suraj Gan Gignar)

यह भक्ति गीत साध्वी यशोधरा जी द्वारा रचित है। इसमें आचार्य भिक्षु के प्रति गहरा प्रेम, श्रद्धा और समर्पण व्यक्त किया गया है। गीत में उनके त्याग, वैराग्य और धर्म के प्रति योगदान का सुंदर वर्णन है। हर पंक्ति में भक्ति की भावना और गुरु के प्रति आदर झलकता है। यह गीत हमें सच्चे मार्ग पर चलने और अपने जीवन में अच्छे संस्कार अपनाने की प्रेरणा देता है। 

 

म्हारै हिवड़े रो हार चमक्यो सूरज गण गिगनार

🎶 लय – दीज्यो-दीज्यो जी म्हारा वीरा नै संदेश  

✍🏻 रचयिता – साध्वी यशोधरा जी

 

म्हारै हिवड़े रो हार, चमक्यो सूरज गण गिगनार, 

भीखण प्यारो रे।।

 

सांस-सांस में म्हारै भिक्षु, नाम री सुवास है, 

कष्टां री काळी रातां, दिव्य प्रकाश है, 

उतारां आरती म्है आज, थां पर म्हानै पूरो नाज, 

निजर निहारो रे।।

 

शासन सुरगां रो बासो, मलयज बयार है, 

सतरंगा फूल खिल्या है, गण मन्दार है, 

करां म्है यशगाथा संगान, फैली सौरभ सकल जहान, 

मोहनगारो रे।। 

 

‘कांट’ ज्यूं पाई ख्याति, जनम्या मरुधर में रे, 

धर्म क्रांति रो बिगुल बजायो, पंचम आ’रै में रै, 

जाग्यो यौवन में वैराग, बणग्या जग रा चैन चिराग, 

गण रखवालो रे।।

 

भिक्षु रै बलिदानां स्यूं, गण माटी चन्दन है, 

गण-धूलि शीष चढ़ावां, गण शिव स्यन्दन है, 

पहुँची सात समन्दर पार, अणुव्रत प्रेक्षा री गुंजार, 

जग उजियारो रे।।

 

जबर पुण्याई जागी, पाया गणमाली है, 

महाप्रज्ञ रै शुभ साये में, हर पल दिवाली है, 

सुषमा सुरगां सी महकाई, बाजै गण में यश शहनाई, 

अजब नजारो रे।।

 

यह भजन हमें आचार्य भिक्षु के महान जीवन से प्रेरणा लेने का संदेश देता है। उनके आदर्शों को अपनाकर हम अपने जीवन को बेहतर बना सकते हैं और सच्चे धर्म मार्ग पर आगे बढ़ सकते हैं।

🙏 जय जिनेंद्र 🙏