गण नन्दनवन पा हरसावां (Gan Nandanvan Pa Harsava)

यह भजन “गण नन्दनवन पा हरसावां” साध्वी यशोधरा जी द्वारा रचित एक अत्यंत भावपूर्ण और भक्ति से भरा हुआ स्तवन है। इसमें आचार्य भिक्षु के पावन नाम की महिमा, उनके तप, त्याग और संघ निर्माण की गौरवगाथा को सरल शब्दों में व्यक्त किया गया है। भजन में भक्त का अपने गुरु के प्रति गहरा प्रेम, श्रद्धा और समर्पण झलकता है।

 

गण नन्दनवन पा हरसावां

🎶 लय – काजळियो

✍🏻 रचयिता – साध्वी यशोधरा जी 

 

गण नन्दनवन पा हरसावां, 

पय-मिश्री ज्यूं म्हें घुल ज्यावां।

उजळी-उजळी गण री तस्वीर है।।

 

भिक्षु-भिक्षु है मंगलकारी नाम हो, 

भिक्षु-भिक्षु जपां म्है आठूं याम हो,

होऽऽऽ म्हांरै रग-रग में रमगी, 

इण नाम री सुवास हो, 

रोग-शोक सारा मिट ज्यावै, 

भूत-प्रेत भी शीष झुकावै, 

भव-भयहारी है, नाम भिक्षु स्वाम रो।।

 

थांरै तप स्यूं बणी है माटी चन्दन हो, 

थांरै चरणां में करां सौ-सौ वन्दन हो,

होऽऽऽ थांरै संघ-री फुलवारी, 

म्हानै लागै मोहनगारी हो, 

रंग-बिरंगा फूल खिलावै, 

संघ सितारा झिल-मिलावै, 

तूफानां में भी नहीं बुझे ओ दीप हो।।

 

संघर्षा स्यूं थे जूझ्या बड़वीर हो,

सह्या कष्टां नै बणकर धीर हो,

होऽऽऽ बाबै बजरंगी री, 

जग में महिमां भारी हो, 

कण-कण में जागे नवचिंतन, 

लोहपुरुष थांरो अभिनन्दन, 

मानस मंदिर में जलै थांरी जोत हो।।

 

यह भजन हमें आचार्य भिक्षु के आदर्शों पर चलने की प्रेरणा देता है। उनके नाम और उपदेशों का स्मरण जीवन में शांति, साहस और सही दिशा प्रदान करता है। यही इसकी सबसे बड़ी विशेषता है। 

🙏 जय जिनेंद्र 🙏