ॐ भिक्षु जय भिक्षु मंत्र बड़ा ही सुखकारी रे (Om Bhikshu Jai Bhikshu Mantra Bada Hi Sukhkari Re)

यह भजन आचार्य भिक्षु के पवित्र नाम की महिमा को बहुत सरल और भावपूर्ण शब्दों में व्यक्त करता है। इसमें बताया गया है कि उनके नाम का जप मन को शांति और सुख देता है। भजन में भिक्षु के त्याग, ज्ञान और प्रेरणा का सुंदर वर्णन है। यह हमें सिखाता है कि गुरु के नाम का स्मरण करने से जीवन के कष्ट दूर होते हैं और आत्मा को सच्चा मार्ग मिलता है। यह भक्ति और विश्वास को मजबूत बनाता है। 

ॐ भिक्षु जय भिक्षु मंत्र बड़ा ही सुखकारी रे

🎶 लय – पायलिया हो हो हो हो

✍🏻 रचयिता – साध्वी यशोधरा जी 

 

ॐ भिक्षु जय भिक्षु, 

मंत्र बड़ा ही सुखकारी रे, 

तन्मय हो जपने से, 

होगा निश्चित ही बेड़ा पार रे, 

सांवरिया हो… हो… हो…, 

दीपांलाल हो… हो… हो…।।  

 

नाम तेरा संकट मोचक, 

जन-मन रोचक, मंगलकारी हो, 

प्रभुवर हो।।

 

भिक्षु तू मेरा राम है, 

तू ही मेरा घनश्याम, 

मेरे दिल की हर धड़कन में, 

है भिक्षु तेरा नाम। 

 

तू है जीवन की ज्योति, 

तव चमक-दमक कलधौती, 

तकदीर सराहें पाकर, 

तुम जैसा दिव्य दिवाकर। 

 

तेरे बलिदानों से, 

गण नींवें गहरी, 

शासन आब बढ़ाएं, 

बन गण प्रहरी हो, 

प्रभुवर हो।।

 

शिव शंकर तुम कहलाए, 

विष की घूंटो को पीकर, 

आगम मन्थन से पाया, 

वो तत्त्व दिया खुद जीकर। 

 

तूं है समता का सागर, 

गुण रत्नों का तूं आकर, 

तूं है धरती का सूरज, 

कण-कण है हुआ उजागर ।

 

तेरी सूझ-बूझ से, 

तेरापथ पाएं, 

उतरा स्वर्ग धरा पर, 

मन उपवन सरसाएं हो, 

प्रभुवर हो।।

 

कष्टों में ना घबराएं, 

आगे बढ़ते ही जाएं, 

फौलादी संकल्पों से, 

इतिहास नया गढ़ पाएं। 

 

गण की आदर्श मीनारें, 

निरखें नित नए नजारे, 

अपना हम रूप निहारें, 

शासन में मलय बहारें।

 

भिक्षु चेतना जागे, 

बुहारें पथ के कांटे, 

प्रज्ञा दीप जलाएं, 

घर-घर अमृत बांटें हो, 

प्रभुवर हो।।

 

यह भजन हमें आचार्य भिक्षु के नाम की शक्ति का अनुभव कराता है। उनके स्मरण से जीवन में शांति, साहस और सही दिशा मिलती है। यह भक्ति और सकारात्मक सोच को बढ़ाने का सुंदर माध्यम है। 

🙏 जय जिनेंद्र 🙏