यह भजन “भिक्षु की अभिवन्दना हम कर रहे” साध्वी जयश्रीजी द्वारा रचित एक सुंदर और भावपूर्ण स्तुति है। इसमें आचार्य भिक्षु के महान जीवन और उनके उपदेशों का सरल शब्दों में वर्णन किया गया है। यह भजन हमें उनके नियम, त्याग और संघ-सेवा की याद दिलाता है। इसमें भक्ति, श्रद्धा और कृतज्ञता का भाव है। इस भजन को गाने से मन में शांति, प्रसन्नता और प्रेरणा उत्पन्न होती है।
भिक्षु की अभिवन्दना हम कर रहे
🎶 लय – दिल के अरमाँ आँसुओं में बह गए
✍🏻 रचयिता – साध्वी जयश्रीजी
भिक्षु की अभिवन्दना हम कर रहे।
स्मरण से मन में खुशाली भर रहे ।।
आ गये वे विश्व की तकदीर बन।
नाम से भव-सिन्धु सारे तर रहे।।
जिन्दगी भर बन शमां जलते रहे।
रोशनी से हम अंधेरा हर रहे।।
संघ-हित कानून जो तुमने दिए।
आज हम अभिमान उन पर कर रहे।।
संघ का हर गुल महक देता नई।
विश्व को सुरभित उसी से कर रहे।।
तुलसी की शुभ शासना से धन्य हैं।
भक्ति से ये प्राण गण पर धर रहे।।
यह भजन हमें आचार्य भिक्षु के प्रति श्रद्धा और उनके मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। उनके उपदेशों से जीवन में प्रकाश और सही दिशा मिलती है। भक्ति से मन शांत और मजबूत बनता है।
🙏 जय जिनेंद्र 🙏
