यह भजन “भिक्षु स्वाम, ज्योतिर्धाम पावन नाम” परम पूज्य आचार्य भिक्षु स्वामी की महिमा का सुंदर वर्णन करता है। इसमें उनकी करुणा, अहिंसा और महान आध्यात्मिक प्रभाव को भावपूर्ण शब्दों में गाया गया है। आचार्य भिक्षु स्वामी सब दुखों को दूर करने वाले और सच्चे मार्ग दिखाने वाले महान संत हैं। साध्वी कनकश्री जी द्वारा रचित यह भजन भक्ति और प्रेरणा से भरपूर है।
भिक्षु स्वाम ज्योतिर्धाम पावन नाम
🎶 लय – जय हनुमान अति बलवान
✍🏻 रचयिता – साध्वी कनकश्री जी
भिक्षु स्वाम, ज्योतिर्धाम पावन नाम,
दीपानंदन! म्हारै तो थांरो ही आसरो,
हे सब दुःख भंजन !
म्हारै तो थांरो ही आसरो।
थांरो ही आसरो, सदा सुखवास रो।।
बाबो है भक्त वत्सल,
भगतां नै तारै,
सारै है काम सब रा,
दुःखड़ा निवारै।
जय महासंत! भिक्षु भदंत ! शक्ति अनंत।।
श्रावक शोभजी जद,
सिंवस्या हा जेल में,
करतां ही दरसण बेड्या,
टूटी खेल-खेल में।
बढ्यो प्रभाव, चमक्यो नांव, उमड्या गांव ।।
अंधेरी ओरी साक्षी,
थांरै समय री,
गावै है गाथा मैत्री,
अहिंसा, अभय री।
नमग्या देव, पदरज सेव, करै सदैव।।
ॐ भिक्षु मंत्र में है,
चमत्कार भारी,
जय भिक्षु मंत्र में है,
चमत्कार भारी।
भिक्षु समाधि-स्थल है,
सिद्ध सिरियारी
लाखां लोग पा आलोक, बणै अशोक।।
म्हांरै तो पल-पल छिन छिन,
स्वामीजी री घ्यावना,
‘कनक’ दिखाद्यो मूरत,
फलै मन भावना।
करो निहाल, कृपा विशाल, गण प्रतिपाल।।
यह भजन आचार्य भिक्षु स्वामी के प्रति गहरी श्रद्धा और भक्ति की भावना को व्यक्त करता है। इसे गाने और सुनने से मन में शांति, विश्वास और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा मिलती है।
🙏 जय जिनेंद्र 🙏
