यह प्रेरणादायक भजन “भिक्षु को भूलाएं कैसे? भिक्षु नाम प्यारा है” साध्वी राजीमती जी द्वारा रचित है। इसमें आचार्य भिक्षु के आदर्श जीवन, सत्य के प्रति उनकी निष्ठा और संयम के मार्ग का सुंदर वर्णन किया गया है। भजन बताता है कि आचार्य भिक्षु ने अंधकार में दीपक की तरह धर्म का प्रकाश फैलाया और साधना, तप तथा सत्य का मार्ग दिखाया।
भिक्षु को भूलाएं कैसे? भिक्षु नाम प्यारा है
🎶 लय – जनम स्यूं कुंवारो
✍🏻 रचयिता – साध्वी राजीमती जी
भिक्षु को भूलाएं कैसे?
भिक्षु नाम प्यारा है।
रात की अन्धेरी में वह,
दीप सा उजारा है।।
सत्य को पुकारा जिसने,
ज्योती को बुलाया।
चेतना का चिन्मय दीपक,
जिसने जलाया।
आरती उतारै सौ सौ,
वंदन हमारा है।।
प्रण के लिए जो मरता,
वही तो महान है।
खुद के लिए जो बनता,
वही तो विधान है।
बुझते चिराग चलते,
तप से उबारा है।।
तूफान लिखते जिनका,
इतिहास हाथों से।
मिलती सचाई उनको,
लड़ते जो रातों से।
सुख तो मिलेगा सच्चा,
संयम सहारा है।।
निर्माण होता खुद से,
तुमने बताया था।
कांटों के पथ पर चलना,
तुमने सिखाया था।
कैसी बहाई जग में,
पुण्य मुक्ति धारा है।।
सैनिक सभी हम गण के,
पहरा लगायेंगे।
प्राणों की देकर बाजी,
सुयश फैलायेंगे।
बढ़ते चलो सब आगे,
तुलसी का नारा है।।
यह भजन हमें आचार्य भिक्षु के आदर्शों को स्मरण रखने और उनके बताए संयम, सत्य तथा साधना के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। उनके महान विचार आज भी जीवन को उज्ज्वल बनाने का संदेश देते हैं।
🙏 जय जिनेंद्र 🙏
