यह भजन आचार्य आचार्य भिक्षु की महानता, तपस्या और उनके द्वारा स्थापित मर्यादाओं का गुणगान करता है। इसमें बताया गया है कि आचार्य भिक्षु ने धर्म, अनुशासन और निष्ठा का जो मार्ग दिखाया, वह आज भी समाज को प्रेरणा देता है। उनके उपकार, उनकी वाणी और उनकी शिक्षाएँ आज भी जन-जन के जीवन को प्रकाशित कर रही हैं।
जन जन पुकारे भिक्षु हमारे महा उपकारी
🎶 लय – राधा बिना है
जन जन पुकारे,
भिक्षु हमारे महा उपकारी,
भिक्षु महा उपकारी।
दीपां के प्यारे,
आंखों के तारे महा उपकारी,
भिक्षु महा उपकारी।।
तुमने जो रेखाएं खींची,
गहरी करते जाएंगे,
तुमने चित्र बनाए,
उनमें रंग उभरते जाएंगे,
कलाकार तेरी अनुपम कलाएं।।
मर्यादाएं निर्मित करके,
निष्ठा का निर्माण किया,
एक एक मुनि का मन जीता,
आस्था का संधान किया,
तेरी कृपा का पार न पाएं।।
सिरियारी की हाट तुम्हारी,
गौरव गाथा गाती है,
नगर केलवा की अंधेरी ओरी,
शीष झुकाती है,
तेरी कहानी गीतों में गाएं।।
अनेकांत के अतुल उपासक,
शासक भिक्षु अलबेले,
घोर विरोधों की ज्वाला,
में भी हंसते-हंसते खेले,
अनगिन कथाएं क्या क्या सुनाएं।।
मिथ्यात्वी या सम्यक्त्वी हो,
धर्मक्रिया कर सकता है,
मिथ्यात्वी सम्यक्त्वी बनकर,
भवसागर तर सकता है,
भिक्षु तेरी वाणी घर-घर पहुंचाएं।
कण-कण में क्षण-क्षण में,
भिक्षु भिक्षु गण में बोल रहे,
जन-जन के मन-मन में,
भिक्षु मस्तक-मस्तक डोल रहे,
भिक्षु तेरे नाम की अलख जगाएं।
भिक्षु तेरी इस बगिया में,
सुन्दर सुन्दर सुमन खिले,
एक एक से बढ़कर,
गण उपवन के रक्षक इसे मिले,
सुन्दर यह उपवन स्वस्थ बनाए।।
कब से इन्तजार करते हैं,
सुन्दर सूरत दिखलाओ,
भक्तों को संबोध मिलेगा,
एक बार भिक्षु आओ,
जनता है प्यासी प्यास बुझाएं।
भिखु को क्यों बाहर खोजें,
भिक्षु देखो पट्टासीन,
तुलसी महाप्रज्ञ में खोजें,
भिक्षु मिलेंगे नित्य नवीन,
फिर क्यों भिक्षु को धरा पे बुलाएं।।
यह भजन आचार्य भिक्षु के महान उपकारों और उनकी अमर शिक्षाओं की याद दिलाता है। उनकी वाणी और मर्यादाएँ आज भी समाज को मार्ग दिखाती हैं। उनके प्रति श्रद्धा और भक्ति का यह भाव सदैव बना रहे।
🙏 जय जिनेंद्र 🙏
