अब तो पधारो भगवन्‌! प्राणां री प्यास है (Ab To Padharo Bhagvan! Prana Ri Pyas Hai)

यह भजन प्रभु से करुण पुकार है। भक्त अपने अंतर की गहरी प्यास व्यक्त करता है और भगवान से शीघ्र पधारने की विनती करता है। इसमें सुख-दुख में प्रभु के सहारे का भाव है। हर कण में प्रभु की उपस्थिति मानी गई है। भजन श्रद्धा, विश्वास और समर्पण से भरा है। इसमें जिन धर्म की महिमा और मुक्ति मार्ग की सच्चाई का स्मरण कराया गया है।

 

अब तो पधारो भगवन्‌! प्राणां री प्यास है

🎶 लय – डस गयो कालो नाग

✍🏻 रचयिता – साध्वी राजीमती जी

 

अब तो पधारो भगवन्‌! प्राणां री प्यास है।

जल्दी बताद्यो म्हांनै, कठै थांरो वास है।।

 

सुख में सहारो भिक्षु, दु:ख में सहारो,

संकट मोचनहारो, नाम तुम्हारो।

परचा मिले है जिणनै, पुरो विश्‍वास है।।

 

रूं रूं में बोले भिक्षु, कण-कण में भिक्षु,

सोवत जागत भिक्षु, खिण-खिण में भिक्षु।

मंदिर में आओ अब तो, दीये में उजास है।

 

कष्ट तो घणां ही सह्या, के के बतावां,

हंसता हलाहल पीग्या, हिम्मत सरावां।

भालुड़ा री ऊपर नोका पर, वीरां रो निवास है।।

 

रोट्यां पड़ी ही कठै, धोवण सारो खूटग्यो,

जग्‍यां देवण नै मानौ, जग सारो रुठग्‍यो।

बगड़ी री छत्र्यां मांही, पहलो निवास है।।

 

नियम बणाकर जबरा, नींव जमाई,

लाखा री डूबत नैय्या, पार लगाई।

थांरो बलिदान बणग्यो, गण इतिहास है।।

 

भागां स्यूं पायो आपां, खरो जिन धर्म है,

मुगति रो मारग साचो, बणणो अकर्म है।

अब तो किनारो म्हांरै, बिलकुल पास है।

 

यह भजन हमें सच्ची श्रद्धा और अटल विश्वास का संदेश देता है। यह सिखाता है कि जीवन के हर क्षण में प्रभु का स्मरण करें और जिन धर्म के मार्ग पर दृढ़ रहें। तभी आत्मा को सच्ची शांति मिलती है।

🙏 जय जिनेंद्र 🙏