भिक्षु-भिक्षु-भिक्षु म्हारी आत्मा पुकारै (Bhikshu-Bhikshu-Bhikshu Mhari Aatma Pukare)

यह भजन मुनि श्री चम्पक (भाईजी महाराज) द्वारा रचित है। इसमें आचार्य श्री भिक्षु स्वामी के चमत्कार, करुणा, साहस और आध्यात्मिक प्रभाव का भावपूर्ण वर्णन किया गया है। भजन में अनेक घटनाओं के माध्यम से यह बताया गया है कि स्वामीजी का नाम और स्मरण भक्तों के संकट दूर करता है। कठिन परिस्थितियों में भी उनके आश्रय से भय मिटता है और आत्मबल जागृत होता है।

 

भिक्षु-भिक्षु-भिक्षु म्हारी आत्मा पुकारै

🎶 लय – खम्मा-खम्मा म्हारै  

✍🏻 रचयिता – मुनि श्री चम्पक (भाईजी महाराज) 

 

भिक्षु-भिक्षु-भिक्षु म्हारी आत्मा पुकारै,

भिक्षु रो म्है साचो परचो पायो जी ओ।

जद‌-जद भीड़ पड़ी भगतां में तो,

स्वामीजी रो शरणो, आडो आयो जी ओ।।

 

शोभजी श्रावक नै नाथद्वारा जेल में,

सदेह दरसण देण भिक्षु आया जी ओ।

ऊठतां तड़ाक बेड्यां टूट दूरी पड़गी,

तो देख सारा इचरज पाया जी ओ।।

 

स्वामीजी नै सिंवरया जद जोधपुर दरबार में।

पटवोजी पूरी बाजी लेग्या जी ओ,

रूपांजी रो खोड़ो टूट्यो रावळिया रे रावळै,

राजी राजी घर का दीक्षा देग्या जी ओ।।

 

धगधगता खीरा बरस्या बीदासर में,

होग्या सै बैहोश संत बाकी जी ओ।

जयाचार्य तन्मय स्तवना सुणाई,

‘मुणिन्द मोरा’ ढाळ आज साखी जी ओ।।

 

जब्बलपुर जांवतां चम्पक मुनि नै,

शेर दो बबरची मिलग्या जी ओ।

भिक्षु-स्वाम भिक्षु-स्वाम नाम सहज्यां निकल्यो,

बीस हाथ शेर दूर टळग्‍या जी ओ।।

 

स्वामीजी री ओट ली जसोल वाला मानजी,

तो काळियै रो जहर उतरग्यो जी ओ।

जंतर-मंतर झाड़ा-झपटा सारा उत्तर दे दिया,

पर स्वामीजी रो नाम काम करग्यो जी ओ।।

 

बोरावड़ रै ठाकरां पर सेना चढ़ आई,

मघवागणी शरणा सुणाया जी ओ।

कोट स्यूं उतरती फोजां देखी अणगिणती,

भागता कुचामण पाछा आया जी ओ।।

 

एक के अनेक छेक देखल्यो थे परचा,

डूबतां री नाव कांठे आई जी ओ।

बारे बारे फिरै पड़ी बीच में तिजूरी,

डाकुआं री आंख्यां चुंधियाई जी ओ।।

 

रात नै विरात नै एकलो के दोकलो,

जद जद डर भय लागै जी ओ।

स्वामीजी रो नाम लियां खड़या हुवै रूंगटा,

आतमा में पौरुष जागै जी ओ।।

 

दीपां रो दुलारो प्यारो हार हिया रो,

संकट मोचन हारो अजमाल्यो जी ओ।

अपणो जाण वत्सलता स्यूं सावळ बुचकार कर,

‘चम्पक’ नै एकरस्यां हियै लगाल्यो जी ओ।।

 

यह भजन हमें सिखाता है कि सच्चे गुरु का स्मरण जीवन में शक्ति और शांति देता है। श्रद्धा से लिया गया नाम भय और संकट को दूर करता है। गुरु-भक्ति ही आत्मबल और आध्यात्मिक उन्नति का आधार है।

🙏 जय जिनेंद्र 🙏