यह भजन आचार्य श्री महाश्रमण द्वारा रचित है। इसमें श्री भिक्षु स्वामी के महान व्यक्तित्व और उनके अद्भुत प्रताप का वर्णन किया गया है। कवि ने बताया है कि उनके नाम का स्मरण करने से दुख और संताप दूर हो जाते हैं। उन्होंने सत्य, समानता और धर्म का संदेश दिया। उनका जीवन त्याग, संयम और गहरी आस्था से भरा था। यह रचना हमें गुरु के आदर्शों को अपनाने की प्रेरणा देती है।
श्री भिक्षु स्वामी रो परम प्रताप है
🎶 लय – आने वाले कल की तुम
✍🏻 रचयिता – आचार्य श्री महाश्रमण
श्री भिक्षु स्वामी रो परम प्रताप है।
श्रद्धा-विधियुत नाम समरतां,
मिटै बहुल संताप है।
मिलै नहीं जद अन्य सहारो,
महापुरुषां नै याद करां,
दु:ख भय री स्थितियां में,
आस्थासिक्त स्वरां स्यूं नाद करां।
जन-जन रोज जपै जयकारी जाप है।।
सत्य, साम्य रा सजग पुजारी,
महावीर प्रभु-प्रतिनिधि हा,
आगम पर गहरी आस्था,
गंभीर ज्ञान रा जलनिधि हा।
संघ-हृदय में गुरु भीखण री छाप है।।
प्राय: पांच बरस लग,
नहीं मिल्यो पूरो भोजन-पाणी,
शान्त भाव स्यूं साफ सुणाता,
जनता नै भगवद् वाणी।
शुद्ध भावना दूर करै सब पाप है।।
सिरियारी प्यारी नगरी में,
अन्तिम श्वास लियो स्वामी,
क्षण-क्षण आत्म-निरीक्षण कर-कर,
बणां सभी अन्तर्यामी।
आस्था बल स्यूं हटै सहज अभिशाप है।।
यह भजन हमें सिखाता है कि श्रद्धा, सत्य और आत्म-निरीक्षण से जीवन पवित्र बनता है। श्री भिक्षु स्वामी का जीवन हम सभी के लिए प्रेरणा है। उनके आदर्शों पर चलकर हम अपना जीवन सफल बना सकते हैं।
🙏 जय जिनेंद्र 🙏
