यह भजन आचार्य श्री महाप्रज्ञ द्वारा रचित एक भावपूर्ण वंदना है। इसमें भिक्षु बाबा के आदर्श जीवन, सत्यनिष्ठा, निर्भयता और दृढ़ संकल्प का सुंदर वर्णन किया गया है। कवि ने उन्हें प्रज्ञा के प्रकाश के रूप में प्रस्तुत किया है, जो अज्ञान की रात्रि में पूर्णिमा के चंद्रमा की तरह मार्ग दिखाते हैं। यह रचना धर्म, संयम और तपस्या के महत्व को बहुत सरल और स्पष्ट शब्दों में समझाती है।
भिक्षु बाबा! लो हमारी वंदना
🎶 लय – दिल के अरमां
✍🏻 रचयिता – आचार्य श्री महाप्रज्ञ
भिक्षु बाबा! लो हमारी वंदना।
चित्त में हो सद्गुणों की स्पन्दना।।
सत्यनिष्ठा ही तुम्हारा प्राण था।
अभय दृढ़संकल्प की अभिवंदना।।
दिया प्रज्ञालोक तुमने लोक को।
निशा में ज्यों पौर्णमासिक चंदना।।
धर्म पर सबका उचित अधिकार है।
सार्वलौकिक धर्म की अभिव्यंजना।।
साधुता है शुद्ध संयम पालना।
हो तपस्या से तमस् की भंजना।।
यह वंदना हमें सत्य, संयम और तप के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती है। भिक्षु बाबा के जीवन आदर्श हमें धर्म को सबके लिए समान रूप से अपनाने का संदेश देते हैं और सद्गुणों को जीवन में उतारने की प्रेरणा देती है।
🙏 जय जिनेंद्र 🙏
