यह एक सुंदर भक्ति-गीत है, जिसकी रचना साध्वी कनकश्री जी ने की है। इसमें स्वामीजी के पावन नाम की महिमा, उनके अनुशासन, साधुपन और धर्म-प्रचार का भावपूर्ण वर्णन किया गया है। गीत में उनके द्वारा समाज में जगाई गई जागृति, नव-उन्मेष और आध्यात्मिक प्रेरणा का चित्रण मिलता है। सरल और भावपूर्ण शब्दों में रचा यह गीत श्रद्धा, विश्वास और भक्ति की भावना को प्रकट करता है।
अलख जगावां स्वामीजी रे नाम री
🎶 लय – ले चालू तन खेत
✍🏻 रचयिता – साध्वी कनकश्री जी
अलख जगावां स्वामीजी रे नाम री,
झुक-झुक करां प्रणाम,
प्यारो लागै है, सांवरिये रो नाम,
माळा फेरां हां, रोज सवेरे शाम।।
मरुधर रो वीरो, कोहिनूर हीरो,
चमक्यो देश-प्रदेश।
जनम्यो कांटां में, रम्यो हो भाटां में,
ल्यायो नव-उन्मेष।।
बरस्यो हो इमरत, लोग हुआ तिरपत,
जाग उठी तकदीर।
धर्म री विवेचना, मर्म भरी देशना,
तोड़ी भव जंजीर।।
तत्त्व प्रतिबोधी, मिलावट विरोधी,
सिरियारी रो सन्त।
साधुपण पाळै, न्याय पथ चालै,
वो मतिमान महन्त।।
एक अनुशासना, बिना है विकास ना,
अनुशासित ओ संघ।
शुद्ध रीत नीत हो, गुरुवां पर परतीत हो,
परमानन्द प्रसंग।।
स्वामीजी रो आसरो, केन्द्र विश्वास रो,
अन्तर्मन रो राम।
संकट कटै है, विघन मिटै है,
सिद्ध हुवै सब काम।।
‘तुलसी, रे परताप स्यूं, भिक्षु भिक्षु जाप स्यूं,
आठूंपहर आराम।
ग्राम सिरियारी, सुरगां री फुलवारी,
पावन तीरथधाम।।
यह भक्ति-गीत स्वामीजी के प्रति गहरी श्रद्धा और विश्वास को प्रकट करता है। उनके नाम का स्मरण जीवन में शांति, साहस और सच्चे मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। यह रचना भक्ति और अनुशासन का सुंदर संदेश देती है।
🙏 जय जिनेंद्र 🙏
