यह भजन तेरापंथ धर्मसंघ के आद्य प्रवर्तक बाबा भिक्षु स्वामी के त्याग, तप और आध्यात्मिक तेज को समर्पित है। तेरस री है रात के पावन अवसर पर रचित यह रचना उनके संघर्षपूर्ण जीवन, ज्ञान-प्रकाश, अनशन और मोक्ष मार्ग को भावपूर्ण शब्दों में प्रस्तुत करती है। सरल भाषा और मधुर लय के साथ यह भजन श्रद्धालुओं के हृदय में भक्ति, आस्था और कृतज्ञता का भाव जगाता है।
तेरस री है रात बाबा आज थां नै आणो है
🎶 लय – एक तेरा साथ हमको दो जहाँ
✍🏻 रचयिता – श्री नरपत जी लूनिया
तेरस री है रात,
तेरस री है रात बाबा आज थां नै आणो है,
तेरस री है रात,
तेरस री है रात बाबा आज थां नै आणो है,
ओ कोल निभाणो है।
बल्लू कुल रो लाल,
बल्लू कुल रो लाल माता दीपां रो दुलारो है,
बल्लू कुल रो लाल,
बल्लू कुल रो लाल माता दीपां रो दुलारो है,
ओ हार हियाँ रो है।
तेरस री है रात बाबा आज थां नै आणो है,
तेरस री है रात।
घर-घर में घूम्या हां, जग्यां नहीं मिली,
श्मशानां में वास कियो,
अंधेरी ओरी में च्यानणियो कर दियो,
यक्ष ने मात कियो।
हो ज्ञान रा दिया,
हो ज्ञान रा दिया चसग्या पुर में वारो न्यारो है,
तेरापंथ सिर धार्यो है।
तेरस री है रात बाबा आज थां नै आणो है,
तेरस री है रात।
अंत समय में थे सिरियारी में आया,
अनशन धार लियो,
पद्मासन मुद्रा में बैठ्या हा एकाशन,
भवजल पार कियो।
हो सिरियारी रो आज,
हो सिरियारी रो आज देखो अजब नजारो है,
थांरो ही सहारो है।
तेरस री है रात बाबा आज थां नै आणो है,
तेरस री है रात।
यह भजन हमें बाबा भिक्षु स्वामी के त्याग, धैर्य और दृढ़ संकल्प से प्रेरणा देता है। उनके दिखाए मार्ग पर चलकर आत्मशुद्धि, संयम और सत्य की साधना करने का संकल्प ही इस भजन का सच्चा संदेश है।
🙏 जय जिनेंद्र 🙏
