आओ स्वामीजी, थांनै झाला दे बुलावां (Aao Swamiji, Thaane Jhaala De Bulavan)

यह भजन आचार्य श्री भिक्षु स्वामी के प्रति भक्त के प्रेम, श्रद्धा और समर्पण की भावनाओं को सरल शब्दों में व्यक्त करता है। लोकधुन धरती धोरां री की लय पर रचा गया यह गीत स्वामीजी को हृदय से आमंत्रित करने, उनके चरणों में तन-मन अर्पित करने और उनके नाम-स्मरण से निर्भय व जाग्रत जीवन जीने की प्रेरणा देता है। तेरस के पावन अवसर पर गुरु-भक्ति, शासन-सम्मान और आध्यात्मिक आनंद की अनुभूति इस भजन का मूल भाव है।

 

आओ स्वामीजी, थांनै झाला दे बुलावां

🎶 लय – धरती धोरां री 

 

आओ स्वामीजी – (3)

थांनै झाला दे बुलावां, 

जाजम पलकां री बिछावां,

कुंकुम पगल्यां स्यूं पधरावां।।

 

थांरी पल-पल रटन लगावां,

निशि दिन पल-पल छिन-छिन ध्यावां।

थांरी गौरव-गाथा गावां।।

 

मानस मंदिर में बिठास्यां,

दीया भक्ति रा जळास्यां।

म्हांरा तन-मन चरण चढ़ास्यां।।

 

थांरो नाम लियां बल जागै,

डर भय हड़को धड़को भागै।

जाणै हरदम थे हो सागै।।

 

तेरस रो दिन पावन आयो,

भिक्षु चरमोत्सव रंग छायो।

जन-मन आनंद घन लहरायो।।

 

थांरै कदमां पर बढ़ पावा,

वचनां पर ऐ प्राण चढ़ावां।

शासन रो सम्मान बढ़ावां।।

 

यह भजन हमें आचार्य श्री भिक्षु स्वामी के चरणों में अटूट श्रद्धा रखने, उनके वचनों पर चलने और जीवन को धर्म, भक्ति व साहस से भरने की प्रेरणा देता है। गुरु-कृपा से मन में शांति और आनंद की अनुभूति होती है।

🙏 जय जिनेंद्र 🙏